From 9a1cad362fd507a184f4588275c6eccf96e908f6 Mon Sep 17 00:00:00 2001 From: Dhruv1249 Date: Wed, 8 Apr 2026 19:46:28 +0530 Subject: [PATCH] added some famous hindi quotes --- frontend/static/quotes/hindi.json | 60 +++++++++++++++++++++++++++++++ 1 file changed, 60 insertions(+) diff --git a/frontend/static/quotes/hindi.json b/frontend/static/quotes/hindi.json index 7c36eb906918..2aa57bba2b51 100644 --- a/frontend/static/quotes/hindi.json +++ b/frontend/static/quotes/hindi.json @@ -324,6 +324,66 @@ "source": "नुसरत फ़तेह अली ख़ान", "length": 128, "id": 53 + }, + { + "text": "धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय; माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय।", + "source": "कबीर दास", + "length": 69, + "id": 54 + }, + { + "text": "रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून; पानी गए न ऊबरे, मोती, मानस, चून।", + "source": "रहीम", + "length": 67, + "id": 55 + }, + { + "text": "ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय; औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होय।", + "source": "कबीर दास", + "length": 63, + "id": 56 + }, + { + "text": "निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय; बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।", + "source": "कबीर दास", + "length": 74, + "id": 57 + }, + { + "text": "करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान; रसरी आवत-जात ते सिल पर परत निशान।", + "source": "कवि वृंद", + "length": 69, + "id": 58 + }, + { + "text": "तुलसी इस संसार में भाँति-भाँति के लोग; सबसे हँस मिल बोलिए, नदी नाव संजोग।", + "source": "तुलसीदास", + "length": 73, + "id": 59 + }, + { + "text": "रहिमन निज मन की व्यथा, मन ही राखो गोय; सुनि अठिलैंहि लोग सब, बाँटि न लेंहि कोय।", + "source": "रहीम", + "length": 79, + "id": 60 + }, + { + "text": "रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि; जहाँ काम आवे सुई, कहाँ करे तरवारि।", + "source": "रहीम", + "length": 73, + "id": 61 + }, + { + "text": "जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग; चंदन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग।", + "source": "रहीम", + "length": 79, + "id": 62 + }, + { + "text": "साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप; जाके हृदय साँच है, ताके हृदय आप।", + "source": "कबीर दास", + "length": 67, + "id": 63 } ] }